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एकला चलो रे

Posted On: 4 Aug, 2010 Others में

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एकला चलो रे कुछ तो गडबड़ है, सिंगल क्यों है आखिर? कहीं हार्ट ब्रेक का मारा तो नहीं बेचारा..? अब तक मिस राइट नहीं मिली क्या..? कहीं गे तो नहीं..? कोई गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम तो नहीं..? सिंगल और वह भी 30-40 पार का, अडो़सी-पडो़सी सहित पूरा समाज चिंतित होने लगता है। अकेली जिंदगी जीने वाला व्यक्ति ऐसी मनोरंजक किताब की तरह है, जिसे कलीग्स, पडोसियों से लेकर ड्राइवर-मेड-धोबी और कुक तक पढ़ना चाहते हैं और अपनी-अपनी समझ से कहानी के अर्थ निकालते-सुनाते हैं। अकेले रहना न तो सजा है और न इसमें कोई मजा है। कुछ लोग अपनी जिंदगी अपनी शर्तो पर जीना चाहते हैं और जीवन का उनके लिए अलग ही मज़ा है ।                                                     Read More

 

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanchita ghosh के द्वारा
August 5, 2010

mera manna hai ki sabhi baaton ka apna ek alag maja hota hai nirbharr karta hai ki aap kya or kaisa chahte hai ?


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